Drones अब ‘आसमान’ से होगी दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की पहरेदारी: NHAI का मास्टर प्लान तैयार!
Drones कैमरों की नजर में होंगे 'ब्लैक स्पॉट्स', स्वतंत्र इंजीनियर संभालेंगे सुरक्षा का मोर्चा

Drones : दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे केवल अपनी रफ्तार के लिए ही नहीं, अब अपनी हाई-टेक निगरानी के लिए भी जाना जाएगा। NHAI (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) ने इस एक्सप्रेसवे के करीब 50 किलोमीटर लंबे ‘एक्सेस-कंट्रोल लिंक’ की सुरक्षा और रखरखाव को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। अब इस हाईवे की खामियों को पकड़ने के लिए जमीन पर गश्त के साथ-साथ आसमान से ड्रोन सर्विलांस का सहारा लिया जाएगा।

📡 ड्रोन सर्वे: हाईवे की हर ‘दरार’ पर होगी पैनी नजर
NHAI के नए नियमों के अनुसार, अब साल में कम से कम दो बार अनिवार्य ड्रोन सर्वे किया जाएगा।

फायदा: ड्रोन के जरिए ली गई हाई-रेसोल्यूशन तस्वीरों और वीडियो से सड़क की सतह पर आने वाली बारीक दरारें, सड़क का धंसाव और जलभराव जैसी समस्याओं का पता समय रहते चल जाएगा।
पुलों की सेहत: एक्सप्रेसवे पर बने पुलों और फ्लाईओवर्स की संरचनात्मक मजबूती की जांच भी अब इसी तकनीक से होगी।
🏗️ स्वतंत्र इंजीनियरों की होगी तैनाती
डीएनडी फ्लाईओवर से शुरू होकर सोहना तक जाने वाले इस मार्ग के लिए स्वतंत्र इंजीनियरों की नियुक्ति की जा रही है। इनकी जिम्मेदारी केवल सर्वे तक सीमित नहीं होगी, बल्कि:
हर महीने प्रगति रिपोर्ट तैयार कर NHAI को सौंपना।
ट्रैफिक मैनेजमेंट और सड़क सुरक्षा के मानकों की कड़ी निगरानी करना।
परियोजना से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपडेट रखना।
🛣️ कनेक्टिविटी का नया हब: डीएनडी से सोहना तक
यह 59 किलोमीटर लंबा लिंक रोड राजधानी के ट्रैफिक के लिए लाइफलाइन है। यह डीएनडी फ्लाईओवर से शुरू होकर कालिंदी कुंज और फरीदाबाद के रास्ते सोहना के पास KMP एक्सप्रेसवे से जुड़ता है।
ताजा स्थिति: इसका 50 किलोमीटर हिस्सा वर्तमान में ट्रैफिक के लिए खुला है, जबकि दिल्ली वाले एलिवेटेड हिस्से का काम इसी साल पूरा होने की उम्मीद है।
🛑 ब्लैक स्पॉट्स की पहचान और समाधान
इस निगरानी का सबसे बड़ा मकसद ‘ब्लैक स्पॉट्स’ (दुर्घटना संभावित क्षेत्र) की पहचान करना है। ड्रोन की मदद से ट्रैफिक पैटर्न को समझा जाएगा ताकि हादसों को कम करने के लिए जरूरी बदलाव तुरंत किए जा सकें।













